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भारत केन्द्र

भारत: रत्न तथा आभूषण का एक संपूर्ण केन्द्र

दुनिया की जैम एंड ज्वैलरी इंडस्ट्री में भारत की अपनी अलग पहचान है।

कौशल और उत्पादों के विशाल रेंज और पूर्ण आकार देने के मामले में कोई और सेंटर भारत के करीब तक नहीं है। हमारे देश ने कई सदियों पहले विश्व को पहला डायमंड दिया था। वही आज ऑफर करता है।

इंडिया सेंटर से वित्त वर्ष 2013-14 में 34.75 अरब अमेरिकी डॉलर का जैम एंड ज्वैलरी निर्यात हुआ। इसमें 19.64 बिलियन अमरीकी डालर का डायमंड पॉलिश, 7.87 अरब अमरीकी डॉलर के सोने के आभूषण, 3.18 अरब अमरीकी डॉलर के स्वर्ण पदक और सिक्के का कारोबार शामिल है। यह असरदार निर्यात प्रदर्शन एक स्थिर, अच्छी तरह से विकसित और तकनीकी रूप से उन्नत विनिर्माण आधार पर बनाया गया है।

सबसे बड़ा डायमंड निर्माता

भारत का विशाल हीरा निर्माण क्षेत्र (सेक्टर) पूरे देश में लगभग 10 लाख लोगों को रोजगार देता है। हालांकि, यह शुरू में केवल छोटे हीरे पर ही केंद्रित था, अब भारत सभी आकारों और प्रकारों के रत्न पत्थरों को काटने के साथ पॉलिश करता है।

ज्यादातर विनिर्माण गतिविधि गुजरात में भारत के पश्चिमी तट पर केंद्रित है, खासकर सूरत में। यहां उच्च तकनीकी मशीनरी और उपकरण वाली फैक्टरियां हैं, जिनमें बड़े पैमाने में उच्च कुशल श्रमिकों द्वारा काम किया जाता है। सूरत दुनिया में कम्प्यूटरीकृत डायमंड प्लानर्स और लेजर मशीनों द्वारा काम करने का सबसे बड़ा केंद्र है। एक ही कॉम्प्लेक्स में 100 से 500 के बीच लेजर फैक्टरियां हैं।

इस उद्योग ने 50 के दशक में बहुत छोटे स्तर से शुरुआत की थी। आज दुनिया का सबसे बड़ा डायमंड काटने और पॉलिश करने का विनिर्माण केंद्र है। भारत आज मूल्य (वैल्यू) के मामले में दुनिया के 65 प्रतिशत पॉलिश हीरों का निर्माण करता है, मात्रा (वॉल्यूम) के मामले में 85 प्रतिशत और डायमंड और रत्न के टुकड़ों ( पीस) की संख्या के मामले में यह 92 प्रतिशत की भागीदारी रखता है।

कारोबार की ओर

द भारत डायमंड बोर्स के मॉडर्न, नए ट्रेडिंग कॉम्प्लेक्स में कामकाज 2010 में शुरू हुआ। यह दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। इसकी भारत के कुल हीरा आयात और निर्यात में करीब 90 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसने देश को एक प्रमुख हीरा व्यापार केंद्र के रूप में भी उभरने में मदद की है।

रत्न, आभूषण और उससे ज्यादा

भारत की आभूषण और रंगीन रत्नों के निर्माण की भी वर्षों पुरानी परंपरा है।

जयपुर रंगीन रत्नों का ट्रेड हब है। इसके साथ कई अलग तरह के रत्नों के निर्माण का दुनिया का सबसे बड़ा केंद्र है। इन रत्नों में तानजानाइट, पन्ना और दूसरे रत्न शामिल हैं।

मॉडर्न ज्वैलरी सेगमेंट में खासकर डायमंड जड़ित प्रोडक्ट्स शुरुआती तौर पर मुंबई के स्पेशल इकोनॉमिक जोन, सीप्ज् केंद्रित थे। तकनीक, कौशल और पर्यावरण की दृष्टि में दुनिया की सबसे सर्वश्रेष्ठ फैक्टरियां आमतौर पर डायमंड निर्माताओं द्वारा बनाई गईं। आज, आधुनिक आभूषण निर्माताओं ने मुंबई के एमआईडीसी और देश के दूसरे हिस्से जैसे सूरत में सूरत सेज, दिल्ली में नोएडा एसईजेड, जयपुर में सीतापुर सेज, कोलकाता में मानिकांचन सेज में अपनी यूनिट खोली हैं। ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार मंे भारत की हिस्सेदारी में इजाफा हो सके।

ज्वैलरी सेगमेंट अब परिपक्व हो गया है। इसकी वजह यह है कि इस सेक्टर में बेहद प्रतिभाशाली डिजाइनरों और कुशल कारीगरों को होना है, जो आभूषणों की सबसे विस्तृत संभावित श्रृंखला का निर्माण कर रहे हैं। यूरोप या अमरीका के लिए डिजाइन की गई डायमंड ज्वैलरी के उत्पादन से लेकर सादे सोने में उत्कृष्ट रूप से तैयार किए जाने वाले आभूषण या डायमंड और रंगीन रत्न जड़े आभूषण, भारत सभी की पेशकश कर रहा है।

गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता

जबकि कारोबार के क्षेत्र में उद्योग की तेजी से प्रगति अपेक्षाकृत अच्छी तरह से ज्ञात है, ऐसे में नैतिक और सामाजिक रूप से जिम्मेदार कारोबार कामकाज पर ध्यान केंद्रित करना अपेक्षाकृत कम ज्ञात पहलू बनता जा रहा है। सभी बड़े निर्माता-निर्यातकों ने श्रमिकों के लिए बेहतर सुविधाएं स्थापित करने और सर्वोत्तम व्यवसायिक अभ्यासों को अपने कामकाज में एकीकृत करने में निवेश किया है। भारत किम्बरली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम का संस्थापक सदस्य था, जो व्यवस्था में अवैध हीरे के प्रवेश को रोकता है। इतना ही नहीं भारत नैतिक, टिकाऊ और जिम्मेदार व्यवसायिक अभ्यासों को मजबूत करने के लिए सभी वैश्विक पहल में भाग लेता है और समर्थन करता है।

भारतीय कंपनियों और व्यापारिक निकाय इस मकसद के लिए स्थापित ट्रस्टों के माध्यम से पिछले कई दशकों से धर्मार्थ और परोपकारी गतिविधियों में शामिल हैं। स्पेक्ट्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, महिलाओं के कल्याण, पर्यावरण की सुरक्षा, आपदाओं के शिकार लोगों को राहत गतिविधियों और लोगों की जिंदगी में सुधार के लिए तैयार की गई कई अन्य पहल शामिल हैं।

आज, भारत डायमंड के लिए सबसे बड़े विनिर्माण केंद्र से एक अग्रणी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक केंद्र बनने की ओर अग्रसर है। भारत वास्तव में एक पूर्ण केंद्र है और आज के विश्व में सभी उत्पादों के लिए खास स्रोत है। वहीं, वैश्विक रत्न और आभूषण उद्योग के लिए एक प्रकाश स्तन्भ है।

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