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नेतृत्व में सबसे आगे

जेम एंड ज्वेलरी एक्स्पोर्ट प्रमोशन काउन्सिल (GJEPC)की स्थापना भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रायल द्वारा 1966 में की गई। यह भारत की आजादी के बाद देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में निर्यात के क्षेत्र में कदम रखने तथा निर्यात बढाने के लिए भारत सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल्स (निर्यात संवर्धन परिषदों) (ईपीसी) में से एक है। सन 1998 से जीजेईपीसी को स्वायत्तता प्रदान की गई है।

जीजेईपीसी रत्न तथा आभूषण क्षेत्र की शीर्ष संस्था है और यह इस उद्योग के लगभग 6000 निर्यातकों का प्रतिनिधित्व करता है। मुंबई के मुख्यालय सहित, जीजेईपीसी के नई दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, सूरत और जयपुर में इसके क्षेत्रीय कार्यालय हैं,ये सभी इस उद्योग के प्रमुख केन्द्र हैं। इस प्रकार से यह सदस्यों की सेवा में तत्पर, नजदीक तथा सीधे तौर पर संवाद द्वारा अधिक सार्थक ढंग से सेवा करने में व्यापक पहुंच के साथ सक्षम है। 

पिछले कुछ दशकों में जीजेईपीसी एक बेहद सक्रिय निर्यात संवर्थन परिषद के रुप में उभरा है और अपने सदस्यों के बीच अपनी पहुँच तथा पकड़ बनाने के लिए कई तरह की संवर्धन गतिविधियों के साथ लगातार प्रयास कर रहा है, ताकि सदस्यों की जरुरतों को सही तरीके से पूरा किया जा सके।

प्रगति संबंधी गतिविधियाँ

जैसा कि नाम से जाहिर है कि जीजेईपीसी की स्थापना का सबसे पहला लक्ष्य रत्न तथा आभूषण उद्योग तथा इसके उत्पादों को बढावा देना था।

पिछले कुछ वर्षों में,जीजेईपीसी द्वारा की गई विभिन्न प्रगतिपरक गतिविधियों ने भारत के रत्न और आभूषण के निर्यात को बढाने में उल्लेखनीय और सकारात्मक प्रभाव डाला है। वर्ष 1966-67 में की गई जीजेईपीसी की स्थापना के वर्ष में निर्यात 2 करोड 80 लाख अमरीकी डॉलर से बढकर इस वर्ष 2013-14 में कुल मिलाकर लगभग 35 अरब अमरीकी डॉलर तक बढ गया है।

जीजेईपीसी की प्रगतिपरक गतिविधियों में भारत में अनेक महत्वपूर्ण व्यापारिक प्रदर्शनी जैसे इंडिया  इंटरनैशनल ट्रेड शो (आईआईजेएस), सिग्नेचर-आईआईजेएस, इंडिया जेम एंड ज्वेलरी मशीनरी एक्सपो (आईजीजेएमई) का योगदान है। रत्न तथा आभूषण प्रदर्शनी,आईआईजेएस देश में और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के भव्य आयोजनों में सबसे बड़ी है। यह देश भर से तथा दुनिया के कई देशों के आगंतुकों और खरीदारों को आकर्षित करती है। सिग्नेचर आईआईजेएस का आयोजन आईआईजेएस के छोटे स्तर के बुटीक शो के रूप में किया गया था, जो अपनी खुद की व्यापारिक विशेषताओं को विकसित करने का स्थान बन चुका है। हाल ही में आईजीजेएमई में छोटा सा बुटिक शो जोडा गया है,जो कि पूरी तरह से प्रौद्योगिकी को समर्पित है और इसने ऐसी महत्वपूर्ण कमी को पूरा किया है,जिसकी मदद से विशाल उत्पादन केन्द्र की कंपनियां आधुनिक विकास के क्षेत्र में अपनी पहुँच सुविधाजनक रूप से बना सकती हैं।      

अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर डीएमसीसी के साथ संयुक्त रूप से दुबई में ग्लोबल जेम ज्वेलरी फेयर (जीजीजेएफ) का आयोजन किया गया। दुनिया भर में अनेक प्रमुख अन्तर्राष्ट्रीय शो में जीजेईपीसी भी भारत के पवेलियन का आयोजन करता है जैसे - जेसीके लास वेगास, बासेल, विचेंजाओरो, दी हांगकांग शो; जिसमें जीजेईपीसी के बैनर तले कई कंपनियां हिस्सा लेती हैं।

समय-समय पर जीजेईपीसी किसी खास योजना के तहत सरकार की विभिन्न निकायों के साथ जुडती है। उदाहरण के तौर पर इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन (आईटीपीओ) के साथ मिल कर 2013 में नई दिल्ली में ‘इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी फेयर’ का आयोजन किया गया। विगत वर्षों में आभूषण व्यापार की उन्नति के लिए पर्यटन मंत्रालय के साथ मिल कर अन्तर्राष्ट्रीय मंचों पर भी करार किये जा चुके हैं।

‘इंडिया इंटरनैशनल ज्वेलरी वीक’ एक ज्वेलरी फैशन वीक है जो भारत तथा विदेशों में आभूषण उद्योग की डिजाइन क्षमता को उजागर करने तथा फैशन के प्रति प्रोत्साहित करने और खरीदारों को आकर्षित करने के लिए है।

परिषद द्वारा विभिन्न क्षेत्र विशेषतः क्रेता-विक्रेता बैठक, दुनिया के अन्य हिस्सों में रत्न तथा आभूषण के महत्वपूर्ण केन्द्रों में प्रतिनिधि मंडलों, जैसी कुछ अन्य व्यापार संवर्धन गतिविधियां का दायित्व वहन किया जाता है।

हीरा उद्योग और इसी प्रकार से रंगीन रत्नों के उद्योगों के बीच पारस्परिक सामंजस्य स्थापित करने के लिए दोनों क्षेत्र के मुख्य हितधारकों के हित में "दी माइन्स टू मार्केट कॉन्फ्रेंस” जैसे महत्वपूर्ण बैठक की सेवाएं प्रदान की हैं।
इन सभी माध्यमों से भारतीय केन्द्र योग्यता और क्षमता को प्रमुखता से तथा प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया है।

परिषद ने ऊपर बताई गई अपनी विभिन्न गतिविधियों के साथ-साथ अपने महत्वपूर्ण वस्तुगत उपलब्धियों के आधार पर अपना स्वयं का प्रकाशन कार्य करती है। उद्योग और परिषद के बारे में तथा उसकी सभी मुख्य गतिविधियों, कार्यक्रमों, परियोजनाओं को परिषद की पत्रिका "सॉलिटेयर" सहित विभिन्न लघु-पुस्तिकाओं, आयोजन संबंधी प्रकाशनों में प्रकाशित तथा वेबसाईट तथा कुछ फिल्में भी प्रसारित हैं।  इस संस्था की अपनी गतिविधियों और उद्योग की विशेषताओं के बारे में पूरे साल अन्तर्राष्ट्रीय संचार माध्यमों द्वारा भी प्रकाश डाला जाता है।  

सरकारी सामंजस्य और प्रतिनिधित्व

जीजेईपीसी, भारत के रत्न तथा आभूषण निर्यात उद्योग की एकमात्र संस्था है जो कि अपने मुद्दों को लेकर सरकार के पास जाती है और उचित उपायों द्वारा समाधान करने के लिए उद्योग की आवाज है।

यह समय-समय पर नीतिगत हस्तक्षेप करने के द्वारा देश की आयात-निर्यात नीति के निर्धारण में भारत सरकार का प्रतिनिधित्व भी करती है। अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर रत्न तथा आभूषण उद्योग से संबंधित मामलों की जानकारी या सलाह के लिए जब सरकार इससे सलाह मांगती है तब यह एक सलाहकार की भूमिका भी निभाती है।

प्रशासनिक एवं अन्य सरकारी संस्थाओं में जीजेईपीसी आभूषण उद्योग का प्रतिनिधित्व भी करती है।

किंबरली प्रोसेस सर्टिफिकेशन स्कीम (केपीसीएस) के लिए यह भरत सरकार के लिए नोडल एजेंसी के तौर पर काम करता है। और यह सभी हीरों को देश के भीतर और बाहर जाने में "संघर्ष-मुक्त" प्रमाणित आवाजाही के डेटा और कागजी कार्यवाई को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उद्योग के विकास का संरक्षक

जीजेईपीसी का मुख्य काम कामकाज की गुणवत्ता को निखारने तथा उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाना है।

जीजेईपीसी के कामकाज की गुणवत्ता को निखारने और उत्पादों की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न उपायों से संबंधित हैं जो आम तौर पर इस उद्योग के मानकों और उत्पादों को बेहतर बनाते हैं।   

परिषद ने देशभर में कई संस्थानों की स्थापना की है जिनमें ‘इंडियन इंस्टीच्यूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी’ (IIGJ) प्रमुख है, जो उद्योग के कारीगरों और डिजाइनरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्रदान करता है।

कई जवाहारात संस्थान इसी की छत्रछाया में काम करते हैं जैसे कि जेमोल़जिकल इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (GII), जेम टेस्टिंग लेबोरेटरी, जयपुर, इंडियन जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली और इंडियन डायमंड इंस्टीट्यूट सूरत आदि संस्थान हैं जो अनुसंधान, प्रशिक्षण तथा प्रमाणीकरण से संबंधित कामकाज सिखाता है। 

जीजेईपीसी भारत सरकार की राष्ट्रीय कौशल विकास परिषद (नेशनल स्किल डेवलपमेंट काउन्सिल-एनएसडीसी) के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करती है। यह आभूषण उद्योग से जुड़े कार्यक्रमों का संचालन करती है। इसने हाल ही में भारत के रत्न तथा आभूषण कौशल परिषद (जेम एंड ज्वेलरी स्किल काउन्सिल-जीजेएससीआई) के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

परिषद इस क्षेत्र से संबंधित नवीनतम विकास या मुद्दों पर जानकारियाँ प्रदान करने के लिए संगोष्ठी और सम्मेलनों का नियमित रूप से आयोजन करता है। परिषद समय-समय पर व्यावसायिक प्रथाओं और नैतिकता के उच्चतम मानकों का पालन करने को प्रोत्साहित करने के लिए संगोष्ठियों का आयोजन करके अभियान शुरू करता है, ताकि इस उद्योग के उच्चतम मानक बरकरार रहें।

पिछले कई वर्षों से "द इंडिया जेम एंड ज्वेलरी अवार्ड” इस उद्योग में अग्रणी कंपनियों की उपलब्धि और उत्कृष्टता को मान्यता प्रदान करता आ रहा है जिसने दूसरों को अपने बेहतर प्रदर्शन का अनुकरण करने के लिए प्रोत्साहित करने की भूमिका निभाई है। अब तक के परिवेश को ध्यान में रखते हुए सामाजिक निर्वहन की जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए इसने महिला उद्यमी के लिए पुरस्कार श्रेणी की शुरुआत भी की है।

कारीगरों, शिल्पकारों और डिजाइनरों का हौसला बढ़ाने तथा उच्च गुणवत्ता के लिए प्रेरित करने के लिए परिषद सालाना एक डिजाइन प्रतियोगिता का आयोजन करती है। जो आज ‘आर्टिसन ज्वैलरी डिजाइन अवार्ड’ के नाम से जानी जाती है।

जीजेईपीसी ने सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़े अपने कार्यक्रम की शुरुआत की है- ज्वैलरी फॉर होप। इसके तहत हर साल परोपकारी काम से जुड़े किसी खास संगठन को मदद की जाती है।

समग्र रुप से देखा जाए तो जीजेईपीसी ने अपने विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों के जरिये आभूषण उद्योग के निर्यात को बढ़ाने में अहम योगदान दिया है। इसने सरकार के विभिन्न संस्थाओं के साथ सामंजस्य स्थापित करके नीति-निर्माण में सरकार का सहयोग किया है  तथा भारतीय उद्योग का प्रचार-प्रसार करके देश-विदेश के लोगों तथा व्यापारियों का ध्यान इसकी ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इससे भारतीय आभूषण उद्योग को जबर्दस्त बढ़ावा मिला है।

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